108 Names of Shri Lakshmi in Hindi PDF | श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली: अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ विधि
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली माता महालक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य, समृद्धि, शुभता और मंगल की देवी माना जाता है। उनके 108 नामों का जप भक्तों को माता लक्ष्मी के विविध दिव्य स्वरूपों से जोड़ता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और भक्ति से श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने से घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली क्या है?
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली माता लक्ष्मी के 108 नामों की पवित्र नामावली है। “अष्टोत्तरशत” का अर्थ होता है 108। इस नामावली में माता लक्ष्मी के गुण, स्वरूप, करुणा, ऐश्वर्य और कृपा का वर्णन किया गया है।
भक्त प्रत्येक नाम के साथ “नमः” बोलकर माता लक्ष्मी को प्रणाम करते हैं और उनसे सुख, समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
108 Names of Shri Lakshmi in Hindi
॥ श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली ॥
वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभज्ञदां भाज्ञदां
हस्ताभ्यां अभयं प्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम् ।
भक्ताभीष्ट फलप्रदां हरिहर ब्रह्मादिभिः सेवितां
पाश्वे पङ्कजशङ्खपद्म निधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभिः ॥
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवल तरांशुक गन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥
ॐ प्रकृत्यै नमः ।
ॐ विकृत्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः ।
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ विभूत्यै नमः ।
ॐ सुरभ्यै नमः ।
ॐ परमात्मिकायै नमः ।
ॐ वाचे नमः ।
ॐ पद्मालयायै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ शुचये नमः ।
ॐ स्वाहायै नमः ।
ॐ स्वधायै नमः ।
ॐ सुधायै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः ।
ॐ हिरण्मय्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ नित्यपुष्टायै नमः ।
ॐ विभावर्यै नमः ।
ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ दित्यै नमः ।
ॐ दीप्तायै नमः ।
ॐ वसुधायै नमः ।
ॐ वसुधारिण्यै नमः ।
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ कान्तायै नमः ।
ॐ कामाक्ष्यै नमः ।
ॐ क्रोधसम्भवायै नमः ।
ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः ।
ॐ बुद्धये नमः ।
ॐ अनघायै नमः ।
ॐ हरिवल्लभायै नमः ।
ॐ अशोकायै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ दीप्तायै नमः ।
ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः ।
ॐ धर्मनिलयायै नमः ।
ॐ करुणायै नमः ।
ॐ लोकमात्रे नमः ।
ॐ पद्मप्रियायै नमः ।
ॐ पद्महस्तायै नमः ।
ॐ पद्माक्ष्यै नमः ।
ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः ।
ॐ पद्मोद्भवायै नमः ।
ॐ पद्ममुख्यै नमः ।
ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः ।
ॐ रमायै नमः ।
ॐ पद्ममालाधरायै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ पद्मिन्यै नमः ।
ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः ।
ॐ पुण्यगन्धायै नमः ।
ॐ सुप्रसन्नायै नमः ।
ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः ।
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ चन्द्रवदनायै नमः ।
ॐ चन्द्रायै नमः ।
ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः ।
ॐ चतुर्भुजायै नमः ।
ॐ चन्द्ररूपायै नमः ।
ॐ इन्दिरायै नमः ।
ॐ इन्दुशीतलायै नमः ।
ॐ आह्लादजनन्यै नमः ।
ॐ पुष्टायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ शिवकर्यै नमः ।
ॐ सत्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ विश्वजनन्यै नमः ।
ॐ तुष्टायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः ।
ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः ।
ॐ श्रियै नमः ।
ॐ भास्कर्यै नमः ।
ॐ बिल्वनिलयायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ वसुन्धरायै नमः ।
ॐ उदाराङ्गायै नमः ।
ॐ हरिण्यै नमः ।
ॐ हेममालिन्यै नमः ।
ॐ धनधान्यकर्यै नमः ।
ॐ सिद्धये नमः ।
ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः ।
ॐ शुभप्रदाये नमः ।
ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः ।
ॐ वरलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वसुप्रदायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः ।
ॐ समुद्रतनयायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ मङ्गळा देव्यै नमः ।
ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः ।
ॐ विष्णुपत्न्यै नमः ।
ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः ।
ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः ।
ॐ नवदुर्गायै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः ।
ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ।
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः ।
॥ इति श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशत नामावलिः ॥
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का पाठ कैसे करें?
1. स्नान और शुद्धि
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान तैयार करें
माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। दीपक और धूप जलाएं।
3. संकल्प लें
परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण के लिए मन में संकल्प लें।
4. पुष्प या अक्षत अर्पित करें
108 नामों के पाठ के दौरान प्रत्येक नाम पर पुष्प, अक्षत या मानसिक रूप से प्रणाम अर्पित करें।
5. नामावली का पाठ करें
शांत मन से माता लक्ष्मी के 108 नामों का पाठ करें।
6. आरती करें
पाठ के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का पाठ कब करें?
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, नवरात्रि और लक्ष्मी पूजन के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त या संध्या समय दीपक जलाकर पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली के लाभ
माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य बढ़ने की मान्यता है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
मन में शांति और भक्ति भाव बढ़ता है।
परिवार में सौहार्द और सकारात्मकता बनी रहती है।
धन के सदुपयोग की प्रेरणा मिलती है।
आध्यात्मिक उन्नति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का अर्थ
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का अर्थ है माता लक्ष्मी के 108 नामों की पवित्र माला। प्रत्येक नाम माता लक्ष्मी के किसी विशेष गुण, शक्ति या स्वरूप को दर्शाता है। इन नामों के माध्यम से भक्त माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हैं।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का महत्व
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली का महत्व इसलिए है क्योंकि 108 संख्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। 108 नामों का जप भक्त के मन को एकाग्र करता है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल मार्ग माना जाता है।
यह नामावली केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि जीवन में संतोष, सदाचार, सेवा, दान और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली की अधिष्ठात्री देवी
इस नामावली की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी हैं। वे भगवान विष्णु की शक्ति और संसार की पालनकर्ता देवी मानी जाती हैं। वे धन, धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य, ज्ञान, करुणा और मंगल की देवी हैं।
निष्कर्ष
श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावली माता लक्ष्मी की आराधना का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली माध्यम है। श्रद्धा, शुद्धता और भक्ति के साथ 108 नामों का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मकता, समृद्धि और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।