कनकधारा स्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित: मूल पाठ, पाठ विधि और लाभ
Kanakadhara Stotram Hindi
कनकधारा स्तोत्रम् माँ लक्ष्मी को समर्पित अत्यंत प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसका पाठ धन प्राप्ति, दरिद्रता नाश, व्यापार में वृद्धि, घर की बरकत, कर्ज से राहत और माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किया जाता है।
यहाँ कनकधारा स्तोत्रम् का मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, कब पढ़ें, कैसे पढ़ें और इसके पारंपरिक लाभ दिए गए हैं।
कनकधारा स्तोत्रम् की मुख्य जानकारी
श्री कनकधारा स्तोत्रम्
माँ लक्ष्मी
धन, सोना, बरकत, व्यापार और दरिद्रता नाश
शुक्रवार, अक्षय तृतीया, दीपावली, धनतेरस
कनकधारा स्तोत्रम् क्या है?
कनकधारा स्तोत्रम् माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। “कनक” का अर्थ सोना और “धारा” का अर्थ प्रवाह होता है। इसलिए इस स्तोत्र को धन, सोना, संपत्ति और आर्थिक बरकत की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
परंपरा के अनुसार, आदि शंकराचार्य जी ने एक निर्धन ब्राह्मण स्त्री के घर में यह स्तोत्र गाया था। उस स्त्री ने अपनी गरीबी के बावजूद श्रद्धा से एक आँवला दान किया था। माँ लक्ष्मी उनकी करुणा से प्रसन्न हुईं और सोने की वर्षा का आशीर्वाद दिया।
जिन लोगों के जीवन में धन की कमी, कर्ज, व्यापार में मंदी, घर में पैसा न टिकना, गरीबी का डर या लगातार आर्थिक रुकावटें हों, वे कनकधारा स्तोत्रम् का पाठ माँ लक्ष्मी की कृपा के लिए कर सकते हैं।
कनकधारा स्तोत्रम् कब पढ़ना चाहिए?
कनकधारा स्तोत्रम् पढ़ने के लिए शुक्रवार सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि शुक्रवार माँ लक्ष्मी की पूजा का दिन है। धन, व्यापार, नौकरी, सोना, घर की बरकत और आर्थिक स्थिरता की कामना हो तो शुक्रवार को इसका पाठ करें।
अक्षय तृतीया, दीपावली लक्ष्मी पूजा, धनतेरस, पूर्णिमा और वैभव लक्ष्मी व्रत के दिन भी कनकधारा स्तोत्रम् का पाठ शुभ माना जाता है। इन दिनों यह पाठ धन और समृद्धि की विशेष प्रार्थना के लिए किया जाता है।
अगर पैसों की तंगी लगातार बनी हुई है, व्यापार नहीं बढ़ रहा, रुका हुआ पैसा वापस नहीं आ रहा या कर्ज का दबाव है, तो 11 शुक्रवार तक नियमित पाठ का संकल्प लिया जा सकता है।
कनकधारा स्तोत्रम् पाठ विधि
कनकधारा स्तोत्रम् का पाठ साफ मन, साफ स्थान और माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति के सामने करना चाहिए। यह पाठ धन के लिए है, इसलिए पूजा के साथ घर और कार्यस्थल की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।
1. पूजा स्थान साफ करें
घर, दुकान या ऑफिस की पूजा जगह को साफ करके माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।
2. दीपक जलाएँ
घी का दीपक जलाएँ और माँ लक्ष्मी को फूल, चावल, कुमकुम या मिठाई अर्पित करें।
3. धन का संकल्प लें
धन प्राप्ति, व्यापार वृद्धि, कर्ज मुक्ति या रुका हुआ पैसा मिलने की स्पष्ट प्रार्थना करें।
4. स्तोत्र का पाठ करें
पूरा स्तोत्र धीरे-धीरे पढ़ें और अंत में माँ लक्ष्मी से स्थायी धन की प्रार्थना करें।
कनकधारा स्तोत्रम् मूल पाठ हिंदी अर्थ सहित
नीचे कनकधारा स्तोत्रम् का प्रचलित मूल पाठ और प्रत्येक श्लोक का सरल हिंदी अर्थ दिया गया है।
॥ श्री कनकधारा स्तोत्रम् ॥
मंगलाचरण
वन्दे वन्दारुमन्दारमिन्दिरानन्दकन्दलम्।
अमन्दानन्दसन्दोहबन्धुरं सिन्धुराननम्॥
हिंदी अर्थ: मैं उस प्रभु गणेश को प्रणाम करता हूँ, जो भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान हैं और जिनका स्मरण आनंद तथा मंगल देता है।
श्लोक 1
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदाऽस्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥ १॥
हिंदी अर्थ: जैसे भौंरा काले तमाल वृक्ष की कलियों पर बैठता है, वैसे ही माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भगवान विष्णु के अंगों पर शोभा देती है। वह मंगल देने वाली लक्ष्मी मेरे जीवन में धन और शुभता लाएँ।
श्लोक 2
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः॥ २॥
हिंदी अर्थ: समुद्र से उत्पन्न माँ लक्ष्मी की प्रेम और लज्जा से भरी दृष्टि बार-बार भगवान विष्णु के मुख पर जाती है। वही कृपा दृष्टि मुझे धन, वैभव और लक्ष्मी प्रदान करे।
श्लोक 3
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षम्
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्धम्
इन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः॥ ३॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की आधी क्षण की कृपा दृष्टि देवताओं को भी ऐश्वर्य देने वाली है। वही कमल जैसी शीतल दृष्टि मेरे ऊपर पड़े और मेरे जीवन में समृद्धि आए।
श्लोक 4
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दम्
आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम्।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रम्
भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः॥ ४॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की आँखें भगवान विष्णु को देखकर आनंद से भर जाती हैं। उनकी वही प्रेममयी दृष्टि मेरे जीवन में धन, उन्नति और सुख का कारण बने।
श्लोक 5
बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः॥ ५॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की कटाक्ष माला भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि के पास हार की तरह शोभा देती है। वह कमलवासिनी माँ मेरे लिए कल्याण और धन की प्राप्ति करें।
श्लोक 6
कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेः
धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव।
मातुस्समस्तजगतां महनीयमूर्तिः
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः॥ ६॥
हिंदी अर्थ: जैसे काले बादल में बिजली चमकती है, वैसे ही माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर शोभा देती हैं। वे जगत की माता मेरे जीवन में शुभता, धन और सुरक्षा दें।
श्लोक 7
प्राप्तं पदं प्रथमतः खलु यत्प्रभावात्
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धम्
मन्दालसं च मकरालयकन्यकायाः॥ ७॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की कृपा से ही कामदेव को भगवान विष्णु जैसे मंगलमय प्रभु पर प्रभाव मिला। वही समुद्रकन्या माँ लक्ष्मी मेरी ओर भी अपनी कृपा दृष्टि डालें।
श्लोक 8
दद्याद्दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम्
अस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरम्
नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः॥ ८॥
हिंदी अर्थ: हे नारायणप्रिया माँ लक्ष्मी, आपकी करुणा की वर्षा इस निर्धन और दुखी भक्त पर धन की धारा बरसाए। मेरे पुराने कष्ट, दरिद्रता और आर्थिक दुख दूर हों।
श्लोक 9
इष्टाविशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र-
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते।
दृष्टिः प्रहृष्टकमलोदरदीप्तिरिष्टाम्
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः॥ ९॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की दयामयी दृष्टि से साधारण भक्त भी स्वर्ग जैसे सुख पा सकता है। उनकी कमल जैसी प्रसन्न दृष्टि मुझे इच्छित धन, पोषण और समृद्धि दे।
श्लोक 10
गीर्देवतेति गरुडध्वजसुन्दरीति
शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै॥ १०॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी को वाणी, विष्णुप्रिया, शाकंभरी और शिवप्रिया रूप में प्रणाम है। वे सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति में स्थित त्रिभुवन की देवी हैं।
श्लोक 11
श्रुत्यै नमोऽस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै
रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै
पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै॥ ११॥
हिंदी अर्थ: शुभ कर्मों का फल देने वाली, सुंदर गुणों की सागर, शक्ति स्वरूपा और कमल में निवास करने वाली माँ लक्ष्मी को प्रणाम। वे भगवान विष्णु की प्रिय और पोषण देने वाली हैं।
श्लोक 12
नमोऽस्तु नालीकनिभाननायै
नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूम्यै।
नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै
नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै॥ १२॥
हिंदी अर्थ: कमल समान मुख वाली, क्षीरसागर से उत्पन्न, चंद्रमा और अमृत की सहोदरी, और भगवान नारायण की प्रिय माँ लक्ष्मी को बार-बार प्रणाम।
श्लोक 13
सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि।
त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये॥ १३॥
हिंदी अर्थ: हे कमलनयनी माँ, आपकी वंदना संपत्ति देने वाली, इंद्रियों को सुख देने वाली और दरिद्रता-दोषों को दूर करने वाली है। मुझे हमेशा आपकी कृपा प्राप्त हो।
श्लोक 14
यत्कटाक्षसमुपासनाविधिः
सेवकस्य सकलार्थसम्पदः।
सन्तनोति वचनाङ्गमानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे॥ १४॥
हिंदी अर्थ: माँ लक्ष्मी की कटाक्ष उपासना भक्त को सभी अर्थ, धन और संपत्ति देती है। मैं मन, वाणी और कर्म से भगवान विष्णु के हृदय में रहने वाली माँ की भक्ति करता हूँ।
श्लोक 15
सरसिजनिलये सरोजहस्ते
धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्॥ १५॥
हिंदी अर्थ: कमल में निवास करने वाली, हाथ में कमल धारण करने वाली, शुभ वस्त्र और सुगंधित माला से सुशोभित माँ लक्ष्मी, तीनों लोकों को समृद्ध करने वाली देवी, मुझ पर प्रसन्न हों।
श्लोक 16
दिग् हस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट-
स्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुताङ्गीम्।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष-
लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥ १६॥
हिंदी अर्थ: जिनका अभिषेक स्वर्ण कलशों से होता है, जो निर्मल जल से स्नान कराई जाती हैं, जो जगत की माता और भगवान विष्णु की पत्नी हैं, उन अमृत सागर की पुत्री माँ लक्ष्मी को प्रणाम।
श्लोक 17
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं
करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥ १७॥
हिंदी अर्थ: हे कमला, कमलनयन भगवान विष्णु की प्रिय, करुणा से भरी अपनी दृष्टि से मुझे देखें। मैं निर्धन और असहाय हूँ, इसलिए आपकी दया का सच्चा पात्र हूँ।
श्लोक 18
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥ १८॥
हिंदी अर्थ: जो भक्त प्रतिदिन इन स्तुतियों से त्रिभुवन माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं, वे गुणवान, बुद्धिमान और बड़े भाग्यशाली बनते हैं।
श्लोक 19
नमोऽस्तु हेमाम्बुजपीठिकायै
नमोऽस्तु भूमण्डलनायिकायै।
नमोऽस्तु देवादिदयापरायै
नमोऽस्तु शार्ङ्गायुधवल्लभायै॥ १९॥
हिंदी अर्थ: स्वर्ण कमल पर विराजमान, पृथ्वी की नायिका, देवताओं पर दया करने वाली और भगवान विष्णु की प्रिय माँ लक्ष्मी को प्रणाम।
श्लोक 20
नमोऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायै
नमोऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै।
नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै॥ २०॥
हिंदी अर्थ: भृगु की पुत्री, भगवान विष्णु के वक्षस्थल में स्थित, कमल में निवास करने वाली और दामोदर की प्रिय माँ लक्ष्मी को बार-बार प्रणाम।
श्लोक 21
नमोऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायै
नमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै।
नमोऽस्तु देवादिभिरर्चितायै
नमोऽस्तु नन्दात्मजवल्लभायै॥ २१॥
हिंदी अर्थ: सुंदर तेज वाली, कमलनयनी, सभी लोकों को उत्पन्न और पोषित करने वाली, देवताओं द्वारा पूजित और भगवान कृष्ण की प्रिय माँ लक्ष्मी को प्रणाम।
॥ इति श्री कनकधारा स्तोत्रम् ॥
कनकधारा स्तोत्रम् पढ़ने के लाभ
कनकधारा स्तोत्रम् का पाठ धन, स्वर्ण, व्यापार, बरकत, दरिद्रता नाश और माँ लक्ष्मी की कृपा के लिए किया जाता है। इसमें माँ लक्ष्मी से सीधी प्रार्थना है कि वे निर्धन भक्त पर धन की धारा बरसाएँ और पुराने कर्मों से आई आर्थिक कठिनाइयों को दूर करें।
धन प्राप्ति
यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी से धन, सोना, संपत्ति और आर्थिक अवसरों की प्रार्थना के लिए पढ़ा जाता है।
दरिद्रता नाश
कनकधारा स्तोत्रम् में निर्धनता, अभाव और आर्थिक दुख दूर करने की स्पष्ट प्रार्थना है।
व्यापार में वृद्धि
दुकान, ऑफिस या व्यापार में ग्राहक, बिक्री, लाभ और रुका हुआ पैसा वापस आने की कामना से यह पाठ किया जाता है।
घर में बरकत
माँ लक्ष्मी की कृपा से घर में धन, अन्न, सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहे, इसके लिए यह स्तोत्र पढ़ा जाता है।
धन और व्यापार के लिए कनकधारा स्तोत्रम् कैसे पढ़ें?
अगर आपकी मुख्य कामना धन और पैसा है, तो शुक्रवार को सुबह या शाम माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर कनकधारा स्तोत्रम् पढ़ें। पाठ से पहले साफ संकल्प लें कि माँ लक्ष्मी आपकी आय, व्यापार, बचत और धन टिकने की शक्ति बढ़ाएँ।
व्यापार के लिए दुकान या ऑफिस की सफाई करके यह पाठ करें। माँ लक्ष्मी से ग्राहक, बिक्री, लाभ, रुका हुआ पैसा, सही अवसर और आर्थिक वृद्धि की स्पष्ट प्रार्थना करें।
कर्ज या पैसों की तंगी में कनकधारा स्तोत्रम् के साथ खर्च पर नियंत्रण, मेहनत, समय पर काम और सही आर्थिक योजना भी जरूरी है। माँ लक्ष्मी की पूजा धन की इच्छा को शुभ कर्म और अनुशासन से जोड़ती है।
कनकधारा स्तोत्रम् से जुड़े सामान्य प्रश्न
कनकधारा स्तोत्रम् किसलिए पढ़ा जाता है?
कनकधारा स्तोत्रम् धन प्राप्ति, सोना, संपत्ति, व्यापार वृद्धि, घर की बरकत, कर्ज से राहत और दरिद्रता नाश के लिए पढ़ा जाता है।
कनकधारा स्तोत्रम् कब पढ़ना चाहिए?
शुक्रवार, अक्षय तृतीया, दीपावली, धनतेरस, पूर्णिमा और सुबह या शाम का लक्ष्मी पूजा समय इसके लिए शुभ माना जाता है।
क्या कनकधारा स्तोत्रम् से पैसा मिलता है?
माँ लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं। कनकधारा स्तोत्रम् में धन की धारा, दरिद्रता नाश और लक्ष्मी कृपा की प्रार्थना है, इसलिए भक्त इसे पैसा और बरकत के लिए पढ़ते हैं।
कनकधारा स्तोत्रम् कितने दिन पढ़ना चाहिए?
सामान्य रूप से शुक्रवार को एक बार पूरा पाठ कर सकते हैं। विशेष धन-संकल्प के लिए 11 शुक्रवार या 21 दिन तक नियमित पाठ किया जा सकता है।
क्या बिना संस्कृत समझे कनकधारा स्तोत्रम् पढ़ सकते हैं?
हाँ, पढ़ सकते हैं। लेकिन अर्थ समझकर पढ़ने से श्रद्धा और ध्यान बढ़ता है, इसलिए मूल पाठ के साथ हिंदी अर्थ पढ़ना बेहतर है।
