Mahalakshmi Ashtakam Stotra in Hindi PDF | महालक्ष्मी अष्टकम

What is Mahalakshmi Ashtakam?

Mahalakshmi Ashtakam is one of the most revered Sanskrit hymns dedicated to Goddess Mahalakshmi, the divine embodiment of prosperity, abundance, auspiciousness, and grace. The stotram consists of eight powerful verses praising different aspects of the Goddess and seeking her blessings.

Traditionally attributed to Adi Shankaracharya, Mahalakshmi Ashtakam is widely recited by devotees during Lakshmi Puja, Fridays, Diwali, and other sacred occasions associated with Goddess Lakshmi.

More than a prayer for material wealth, this stotram teaches devotion, gratitude, inner contentment, spiritual growth, and righteous living. It reminds devotees that true prosperity includes wisdom, peace, virtue, and divine blessings.

Quick Information

Detail Information
Name Mahalakshmi Ashtakam
Associated Deity Goddess Mahalakshmi
Language Sanskrit
Best Day Friday
Best Time Morning or Evening
Main Purpose Worship of Goddess Lakshmi
Spiritual Significance Prayer for Divine Prosperity and Grace
Suitable For All Devotees
Reading Duration 5–10 Minutes
Benefits Devotion, Positivity, Spiritual Growth

 

Mahalakshmi Ashtakam Stotra in Hindi

महालक्ष्मी अष्टकम स्तोत्र हिंदी अर्थ के साथ

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते ।
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥१॥

अर्थ – हे महान मायावी, आप भाग्य की देवी के आसन पर विराजमान हैं और देवताओं द्वारा पूजी जाती हैं।
हे महान लक्ष्मी, आपके हाथ में शंख, चक्र और गदा है, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

नमस्ते गरूडारूढे कोलासूर भयंकरी ।
सर्व पाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥२॥

अर्थ – हे भयानक कोलासुर, गरुड़ पर सवार होकर, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ।
हे देवी महालक्ष्मी, सभी पापों को दूर करने वाली, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी ।
सर्व दुःख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥३॥

अर्थ – वह सब कुछ जानती है और सभी आशीर्वाद देती है और सभी दुष्टों को भयभीत करने वाली है।
हे देवी महालक्ष्मी, सभी कष्टों को दूर करने वाली, मैं आपको प्रणाम करता हूं।

सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।
मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥

अर्थ – वह पूर्णता और बुद्धि प्रदान करती है और आनंद और मुक्ति प्रदान करती है।
हे देवी महालक्ष्मी, सदैव मंत्र रूप में, मैं आपको नमस्कार करता हूं

आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ती महेश्वरी ।
योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ५ ॥

अर्थ – देवी, आदि या अंत से रहित, मूल शक्ति महेश्वरी हैं।
हे महान लक्ष्मी, योग से जन्मी और योग से जन्मी, मैं आपको प्रणाम करता हूं

स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे ।
महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ६ ॥

अर्थ – हे स्थूल, सूक्ष्म, अत्यंत भयानक, अत्यंत शक्तिशाली, अत्यंत उदरमय।
हे महापापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, मैं आपको प्रणाम करता हूं

पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्हस्वरूपिणी ।
परमेशि जगन्मातर्र महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥७॥

अर्थ – कमल के आसन पर विराजमान देवी परम ब्रह्म का अवतार हैं।
हे सर्वोच्च देवी, ब्रह्मांड की माता, हे महान लक्ष्मी, मैं आपको प्रणाम करता हूं।

श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मार्त महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥८॥

अर्थ – देवी को सफेद वस्त्र पहनाए गए और विभिन्न आभूषणों से सजाया गया।
हे ब्रह्माण्ड की माता, हे ब्रह्माण्ड की व्यथा, हे महान लक्ष्मी, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥

अर्थ – जो कोई भी अष्टांगिक देवी के इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है
वह सभी सिद्धियों को प्राप्त करता है और हर समय राज्य प्राप्त करता है।

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनं ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥१०॥

अर्थ – महान पापों के नाश के लिए प्रतिदिन एक समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
जो व्यक्ति प्रतिदिन दो घंटे इस मंत्र का जाप करता है वह धन-धान्य से संपन्न हो जाता है।

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रूविनाशनं ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥

अर्थ – जो व्यक्ति प्रतिदिन तीन बार इस मंत्र का पाठ करता है उसके बड़े-बड़े शत्रु नष्ट हो जाते हैं
महालक्ष्मी सदा प्रसन्न एवं मंगलमय वरदाता रहें।

Mahalakshmi Ashtakam Stotra in Hindi PDF

Mahalakshmi Ashtakam Stotra in Gujarati Lyrics

Simple Meaning of Mahalakshmi Ashtakam

Mahalakshmi Ashtakam praises Goddess Lakshmi as the source of prosperity, wisdom, protection, compassion, and spiritual blessings.

In simple terms, the stotram teaches that true wealth is not limited to money. Peace of mind, knowledge, good character, gratitude, good health, and spiritual growth are equally important forms of prosperity.

Each verse offers salutations to a different aspect of Mahalakshmi and acknowledges her role as the divine mother who protects and nurtures the universe.

महालक्ष्मी अष्टकम के लाभ

  • माता लक्ष्मी के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।
  • नियमित पाठ मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक अनुशासन विकसित करने में सहायता मिलती है।
  • पूजा और साधना के प्रति लगाव बढ़ता है।
  • कृतज्ञता और संतोष की भावना मजबूत होती है।

महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ कैसे करें?

तैयारी

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ रखें।
  • माता लक्ष्मी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

दिशा

  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।

समय

  • प्रातःकाल
  • संध्या समय
  • शुक्रवार विशेष रूप से शुभ

पूजन सामग्री

  • कमल पुष्प
  • दीपक
  • धूप
  • फल
  • नैवेद्य

पाठ संख्या

  • प्रतिदिन 1 बार
  • विशेष साधना हेतु 11 बार
  • अनुष्ठानिक जप हेतु 108 बार

ध्यान रखने योग्य बातें

  • श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें।
  • जल्दबाजी में पाठ न करें।
  • यथासंभव शुद्ध उच्चारण का प्रयास करें।

महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने का सर्वोत्तम समय

दैनिक पाठ

  • सुबह स्नान के बाद
  • संध्या आरती के समय

साप्ताहिक पाठ

  • शुक्रवार

त्योहारों पर

  • दीपावली
  • धनतेरस
  • शरद पूर्णिमा
  • कोजागरी पूर्णिमा
  • वरलक्ष्मी व्रत

विशेष अवसर

  • गृह प्रवेश
  • नया व्यवसाय प्रारंभ करना
  • लक्ष्मी पूजा
  • धार्मिक अनुष्ठान

नियम एवं सावधानियां

पारंपरिक नियम

  • स्वच्छता का पालन करें।
  • श्रद्धा और भक्ति से पाठ करें।
  • पूजा स्थान शांत रखें।

सामान्य गलतियां

  • केवल धन प्राप्ति के उद्देश्य से पाठ करना।
  • अर्थ समझे बिना यांत्रिक रूप से पाठ करना।
  • जल्दबाजी में श्लोक पढ़ना।

व्यावहारिक सुझाव

  • पाठ के साथ अर्थ भी समझें।
  • नियमित समय निर्धारित करें।
  • पाठ के बाद कुछ मिनट ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. महालक्ष्मी अष्टकम क्या है?

यह माता महालक्ष्मी की स्तुति में रचित आठ श्लोकों का प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है।

  1. क्या महालक्ष्मी अष्टकम रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, इसे प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ा जा सकता है।

  1. महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?

शुक्रवार माता लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

  1. क्या महिलाएं महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों इसका पाठ कर सकते हैं।

  1. क्या रात में महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ सकते हैं?

हाँ, संध्या या रात्रि पूजा के समय भी इसका पाठ किया जा सकता है।

  1. क्या शुरुआती लोग महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ सकते हैं?

हाँ, यह सभी भक्तों के लिए उपयुक्त है।

  1. क्या PDF से महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ सकते हैं?

हाँ, किसी भी विश्वसनीय PDF स्रोत का उपयोग किया जा सकता है।

  1. महालक्ष्मी अष्टकम और लक्ष्मी चालीसा में क्या अंतर है?

महालक्ष्मी अष्टकम संस्कृत का अष्टक स्तोत्र है जबकि लक्ष्मी चालीसा चालीस चौपाइयों का भक्तिपाठ है।

  1. क्या परिवार के साथ सामूहिक पाठ कर सकते हैं?

हाँ, सामूहिक पाठ शुभ माना जाता है।

  1. क्या महालक्ष्मी अष्टकम केवल धन के लिए पढ़ा जाता है?

नहीं। यह आध्यात्मिक शांति, भक्ति और समग्र कल्याण के लिए भी पढ़ा जाता है।

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