श्री सूक्तम् हिंदी अर्थ सहित: मूल पाठ, पाठ विधि और लाभ
Shri Suktam in Hindi
श्री सूक्तम् माँ लक्ष्मी को समर्पित अत्यंत पवित्र वैदिक स्तुति है। इसका पाठ धन, सोना, अन्न, पशुधन, व्यापार, घर की बरकत, अलक्ष्मी नाश और स्थायी समृद्धि की कामना से किया जाता है।
यहाँ श्री सूक्तम् का मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ, कब पढ़ें, कैसे पढ़ें और इसके पारंपरिक लाभ दिए गए हैं।
श्री सूक्तम् की मुख्य जानकारी
श्री सूक्तम्
माँ लक्ष्मी / श्री देवी
धन, सोना, अन्न, व्यापार, यश और समृद्धि
शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, पूर्णिमा
श्री सूक्तम् क्या है?
श्री सूक्तम् माँ लक्ष्मी की वैदिक स्तुति है। इसमें अग्नि देव, जिन्हें “जातवेद” कहा गया है, उनसे माँ लक्ष्मी को घर और जीवन में लाने की प्रार्थना की जाती है। इस सूक्त में लक्ष्मी को सोने जैसी आभा वाली, कमल में स्थित, अन्न, धन, पशुधन, यश और समृद्धि देने वाली देवी कहा गया है।
श्री सूक्तम् में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि स्थायी धन, अन्न, गाय, घोड़े, सेवक, परिवार, प्रतिष्ठा, यश, खेती, व्यापार, घर की बरकत और अलक्ष्मी यानी दरिद्रता को दूर करने की स्पष्ट प्रार्थना की गई है।
अगर घर में धन नहीं टिकता, खर्च बढ़ता है, व्यापार में मंदी है, कर्ज का दबाव है या मेहनत के बाद भी आर्थिक स्थिरता नहीं बनती, तो शुक्रवार या लक्ष्मी पूजा के समय श्री सूक्तम् का पाठ बहुत शुभ माना जाता है।
श्री सूक्तम् कब पढ़ना चाहिए?
श्री सूक्तम् पढ़ने के लिए शुक्रवार सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि शुक्रवार माँ लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा हुआ दिन है। धन, व्यापार, नौकरी, घर की बरकत और आर्थिक स्थिरता की कामना हो तो शुक्रवार को यह पाठ जरूर करें।
दीपावली लक्ष्मी पूजा, धनतेरस, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा और वैभव लक्ष्मी व्रत के दिन भी श्री सूक्तम् का पाठ बहुत शुभ माना जाता है। इन दिनों इसे लक्ष्मी पूजन, दीपक, कमल या फूल, चावल और मिठाई के साथ पढ़ सकते हैं।
अगर आपकी मुख्य कामना पैसा, व्यापार, सोना, अन्न, घर की बरकत और दरिद्रता नाश है, तो 11 शुक्रवार तक नियमित श्री सूक्तम् पाठ का संकल्प लिया जा सकता है।
श्री सूक्तम् पाठ विधि
श्री सूक्तम् वैदिक पाठ है, इसलिए इसे शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ना अच्छा माना जाता है। अगर शुद्ध स्वर नहीं आते, तो भी श्रद्धा, साफ मन और अर्थ समझकर धीरे-धीरे पाठ करें। पूजा का स्थान साफ रखें, क्योंकि माँ लक्ष्मी को स्वच्छता प्रिय मानी जाती है।
1. पूजा स्थान साफ करें
घर, दुकान या ऑफिस की पूजा जगह को साफ करके माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।
2. दीपक जलाएँ
घी का दीपक जलाएँ और चावल, फूल, कुमकुम, जल या मिठाई अर्पित करें।
3. स्पष्ट संकल्प लें
धन, व्यापार, कर्ज मुक्ति, घर की बरकत या अलक्ष्मी नाश के लिए संकल्प करें।
4. श्री सूक्तम् पढ़ें
15 मंत्रों का पाठ करें और अंत में माँ लक्ष्मी से स्थायी धन की प्रार्थना करें।
श्री सूक्तम् मूल पाठ हिंदी अर्थ सहित
नीचे श्री सूक्तम् का प्रचलित मूल पाठ और प्रत्येक मंत्र का सरल हिंदी अर्थ दिया गया है।
॥ श्री सूक्तम् ॥
मंत्र 1
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हिंदी अर्थ: हे जातवेद अग्निदेव, सोने जैसी चमक वाली, चंद्रमा जैसी शीतल, स्वर्ण और रजत की माला धारण करने वाली माँ लक्ष्मी को मेरे जीवन में लाएँ।
मंत्र 2
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥
हिंदी अर्थ: हे अग्निदेव, ऐसी स्थिर लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ जो मुझसे दूर न जाए। जिनकी कृपा से मुझे सोना, धन, गाय, घोड़े और योग्य सहयोगी प्राप्त हों।
मंत्र 3
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवीर्जुषताम्॥
हिंदी अर्थ: मैं उस श्री देवी का आवाहन करता हूँ जिनके आगे घोड़े, बीच में रथ और हाथियों की ध्वनि है। ऐसी ऐश्वर्य देने वाली माँ लक्ष्मी मुझे स्वीकार करें।
मंत्र 4
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
हिंदी अर्थ: मैं उस मुस्कुराती हुई, स्वर्ण किले जैसी तेजस्विनी, करुणामयी, संतुष्ट और सबको तृप्त करने वाली, कमल में स्थित कमलवर्णा लक्ष्मी का आवाहन करता हूँ।
मंत्र 5
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
हिंदी अर्थ: मैं चंद्रमा जैसी शीतल, तेजस्विनी, यश से प्रकाशित, देवताओं द्वारा पूजित और उदार पद्मिनी लक्ष्मी की शरण लेता हूँ। मेरी अलक्ष्मी, दरिद्रता और अशुभता नष्ट हो।
मंत्र 6
आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥
हिंदी अर्थ: हे सूर्य जैसी आभा वाली लक्ष्मी, आपके तप से बिल्व वृक्ष उत्पन्न हुआ। उसके फल मेरे अंदर और बाहर की अलक्ष्मी, रुकावट और दरिद्रता को दूर करें।
मंत्र 7
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
हिंदी अर्थ: देवताओं के मित्र और कीर्ति मेरे पास आएँ। मैं इस समाज में सम्मान और पहचान प्राप्त करूँ। माँ लक्ष्मी मुझे कीर्ति और आर्थिक वृद्धि दें।
मंत्र 8
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
हिंदी अर्थ: मैं भूख, प्यास, गरीबी, दरिद्रता और अलक्ष्मी का नाश चाहता हूँ। हे माँ, मेरे घर से अभाव, असमृद्धि और कमी को पूरी तरह दूर करें।
मंत्र 9
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
हिंदी अर्थ: मैं सुगंधित, किसी से पराजित न होने वाली, सदा पोषण देने वाली और सभी जीवों की ईश्वरी श्री लक्ष्मी का आवाहन करता हूँ।
मंत्र 10
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
हिंदी अर्थ: मेरे मन की शुभ इच्छाएँ पूरी हों, मेरी वाणी सत्य हो, पशुधन, अन्न, यश और श्री मेरे जीवन में स्थिर रूप से आएँ।
मंत्र 11
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
हिंदी अर्थ: हे कर्दम, जिनसे प्रजा उत्पन्न हुई, मेरे जीवन में प्रकट हों। कमलमाला धारण करने वाली माँ लक्ष्मी मेरे कुल और घर में निवास करें।
मंत्र 12
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
हिंदी अर्थ: जल और पवित्रता मेरे घर में स्निग्धता, प्रेम और समृद्धि लाएँ। हे चिक्लीत, माँ श्री लक्ष्मी को मेरे कुल में स्थायी रूप से स्थापित करें।
मंत्र 13
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हिंदी अर्थ: हे अग्निदेव, करुणामयी, कमल जैसी, पोषण देने वाली, पीतवर्णा, पद्ममाला धारण करने वाली, चंद्रमा जैसी और स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ।
मंत्र 14
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हिंदी अर्थ: हे अग्निदेव, करुणामयी, कर्मफल देने वाली, सहारा देने वाली, स्वर्णमयी, हेममाला धारण करने वाली और सूर्य समान तेजस्वी लक्ष्मी को मेरे जीवन में लाएँ।
मंत्र 15
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान्विन्देयं पुरुषानहम्॥
हिंदी अर्थ: हे अग्निदेव, ऐसी लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ जो कभी दूर न जाए। जिनकी कृपा से मुझे भरपूर सोना, गाय, सहयोगी, घोड़े और योग्य मनुष्य प्राप्त हों।
संक्षिप्त फलश्रुति
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
श्रियः पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति शुद्ध होकर श्रद्धा से घी की आहुति देता है और श्री की इन पंद्रह ऋचाओं का जप करता है, वह श्री यानी लक्ष्मी की प्राप्ति की कामना कर सकता है।
॥ इति श्री सूक्तम् ॥
श्री सूक्तम् पढ़ने के लाभ
श्री सूक्तम् का पाठ धन, सोना, अन्न, पशुधन, यश, घर की बरकत, व्यापार की वृद्धि और अलक्ष्मी नाश के लिए किया जाता है। इस सूक्त में धन और समृद्धि की प्रार्थना बहुत स्पष्ट रूप से आती है।
धन और सोना
श्री सूक्तम् में हिरण्य, सुवर्ण और प्रभूत धन की प्रार्थना स्पष्ट रूप से की गई है।
अन्न और घर की बरकत
इसमें अन्न, पशुधन, परिवार और घर में स्थायी श्री की प्रार्थना आती है।
व्यापार और यश
कीर्ति, वृद्धि, प्रतिष्ठा और समृद्धि के लिए श्री सूक्तम् बहुत शुभ माना जाता है।
अलक्ष्मी नाश
श्री सूक्तम् में दरिद्रता, अभाव, भूख, प्यास और असमृद्धि को घर से दूर करने की प्रार्थना है।
धन और व्यापार के लिए श्री सूक्तम् कैसे पढ़ें?
अगर मुख्य कामना धन और पैसा है, तो शुक्रवार को शाम के समय माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर श्री सूक्तम् का पाठ करें। पाठ से पहले साफ संकल्प लें कि घर में स्थायी धन, बरकत और सही कमाई के रास्ते खुलें।
व्यापार के लिए दुकान या ऑफिस को साफ करके श्री सूक्तम् पढ़ें। माँ लक्ष्मी से ग्राहक, बिक्री, रुका हुआ पैसा, लाभ, यश और स्थिर आय की स्पष्ट प्रार्थना करें।
कर्ज और आर्थिक तनाव में श्री सूक्तम् के साथ खर्च पर नियंत्रण, सही योजना, मेहनत और ईमानदार कमाई जरूरी है। लक्ष्मी पूजा धन की इच्छा को शुद्ध कर्म और अनुशासन से जोड़ती है।
श्री सूक्तम् से जुड़े सामान्य प्रश्न
श्री सूक्तम् किसलिए पढ़ा जाता है?
श्री सूक्तम् धन, सोना, अन्न, पशुधन, यश, व्यापार, घर की बरकत, अलक्ष्मी नाश और माँ लक्ष्मी की कृपा के लिए पढ़ा जाता है।
श्री सूक्तम् कब पढ़ना चाहिए?
शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, पूर्णिमा और सुबह या शाम का पूजा समय श्री सूक्तम् के लिए शुभ माना जाता है।
क्या श्री सूक्तम् धन प्राप्ति के लिए पढ़ सकते हैं?
हाँ। श्री सूक्तम् में हिरण्य, सुवर्ण, अन्न, पशुधन, यश, कीर्ति और समृद्धि की स्पष्ट प्रार्थना है, इसलिए इसे धन प्राप्ति के लिए पढ़ा जाता है।
श्री सूक्तम् कितनी बार पढ़ना चाहिए?
सामान्य रूप से एक बार पूरा पाठ कर सकते हैं। विशेष संकल्प के लिए शुक्रवार को 11 सप्ताह तक नियमित पाठ किया जा सकता है।
क्या बिना वैदिक स्वर के श्री सूक्तम् पढ़ सकते हैं?
हाँ, पढ़ सकते हैं। अगर वैदिक स्वर नहीं आते, तो भी शुद्ध भावना, सही शब्द और अर्थ समझकर धीरे-धीरे पाठ करना अच्छा है।
