Lalitha Chalisa in Hindi Lyrics PDF | ललिता चालीसा

ललिता चालीसा

परिचय

ललिता चालीसा मां ललिता त्रिपुर सुंदरी को समर्पित एक भक्तिमय स्तुति है। मां ललिता को शक्ति, सौंदर्य, करुणा, ज्ञान और दिव्य ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है। वे दस महाविद्याओं और श्रीविद्या उपासना में अत्यंत महत्वपूर्ण देवी मानी जाती हैं। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ ललिता चालीसा का पाठ करते हैं, ताकि जीवन में शांति, शक्ति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो।

हिंदू धर्म में मां ललिता को आदिशक्ति का एक अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी स्वरूप माना जाता है। उन्हें त्रिपुर सुंदरी, राजराजेश्वरी और श्रीमाता के नामों से भी पूजा जाता है। ललिता चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि और देवी पूजा के अवसरों पर शुभ माना जाता है।

Lalitha Chalisa in Hindi Lyrics

।।चौपाई।।
जयति-जयति जय ललिते माता। तव गुण महिमा है विख्याता।।
तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी। सुर नर मुनि तेरे पद सेवी।।
तू कल्याणी कष्ट निवारिणी। तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी।।
मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी। भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी।।
आदि शक्ति श्री विद्या रूपा। चक्र स्वामिनी देह अनूपा।।
हृदय निवासिनी-भक्त तारिणी। नाना कष्ट विपति दल हारिणी।।
दश विद्या है रूप तुम्हारा। श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा।।
धूमा, बगला, भैरवी, तारा। भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा।।
षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी। ललितेशक्ति तुम्हारी संगी।।
ललिते तुम हो ज्योतित भाला। भक्तजनों का काम संभाला।।
भारी संकट जब-जब आए। उनसे तुमने भक्त बचाए।।
जिसने कृपा तुम्हारी पाई। उसकी सब विधि से बन आई।।
संकट दूर करो मां भारी। भक्तजनों को आस तुम्हारी।।
त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी। जय-जय-जय शिव की महारानी।।
योग सिद्धि पावें सब योगी। भोगें भोग महा सुख भोगी।।
कृपा तुम्हारी पाके माता। जीवन सुखमय है बन जाता।।
दुखियों को तुमने अपनाया। महा मूढ़ जो शरण न आया।।
तुमने जिसकी ओर निहारा। मिली उसे संपत्ति, सुख सारा।।
आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी। महाशक्ति जय-जय, भय हारी।।
कुल योगिनी, कुंडलिनी रूपा। लीला ललिते करें अनूपा।।
महा-महेश्वरी, महाशक्ति दे। त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे।।
महा महा-नन्दे कल्याणी। मूकों को देती हो वाणी।।
इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी। होता तब सेवा अनुरागी।।
जो ललिते तेरा गुण गावे। उसे न कोई कष्ट सतावे।।
सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी। तुम हो सर्वशक्ति संचालिनी।।
आया मां जो शरण तुम्हारी। विपदा हरी उसी की सारी।।
नामा कर्षिणी, चिंता कर्षिणी। सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी।।
महिमा तव सब जग विख्याता। तुम हो दयामयी जग माता।।
सब सौभाग्य दायिनी ललिता। तुम हो सुखदा करुणा कलिता।।
आनंद, सुख, संपत्ति देती हो। कष्ट भयानक हर लेती हो।।
मन से जो जन तुमको ध्यावे। वह तुरंत मन वांछित पावे।।
लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली। तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली।।
मूलाधार, निवासिनी जय-जय। सहस्रार गामिनी मां जय-जय।।
छ: चक्रों को भेदने वाली। करती हो सबकी रखवाली।।
योगी, भोगी, क्रोधी, कामी। सब हैं सेवक सब अनुगामी।।
सबको पार लगाती हो मां। सब पर दया दिखाती हो मां।।
हेमावती, उमा, ब्रह्माणी। भण्डासुर की हृदय विदारिणी।।
सर्व विपति हर, सर्वाधारे। तुमने कुटिल कुपंथी तारे।।
चन्द्र-धारिणी, नैमिश्वासिनी। कृपा करो ललिते अधनाशिनी।।
भक्तजनों को दरस दिखाओ। संशय भय सब शीघ्र मिटाओ।।
जो कोई पढ़े ललिता चालीसा। होवे सुख आनंद अधीसा।।
जिस पर कोई संकट आवे। पाठ करे संकट मिट जावे।।
ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा। पूर्ण मनोरथ होवे सारा।।
पुत्रहीन संतति सुख पावे। निर्धन धनी बने गुण गावे।।
इस विधि पाठ करे जो कोई। दु:ख बंधन छूटे सुख होई।।
जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें। पढ़ें चालीसा तो सुख पावें।।
सबसे लघु उपाय यह जानो। सिद्ध होय मन में जो ठानो।।
ललिता करे हृदय में बासा। सिद्धि देत ललिता चालीसा।।
।।दोहा।।
ललिते मां अब कृपा करो सिद्ध करो सब काम।
श्रद्धा से सिर नाय करे करते तुम्हें प्रणाम।।

ललिता चालीसा क्या है?

ललिता चालीसा मां ललिता देवी की महिमा, शक्ति और कृपा का वर्णन करने वाली चालीस चौपाइयों की भक्ति रचना है। इसमें भक्त मां से ज्ञान, भक्ति, शांति, रक्षा और जीवन के कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

ललिता चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

ललिता चालीसा का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि, देवी जयंती, श्रीविद्या पूजा और विशेष देवी आराधना के दिनों में इसका पाठ अधिक शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद या संध्या के समय शांत मन से इसका पाठ करना उत्तम माना जाता है।

ललिता चालीसा के लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार ललिता चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति, घर में सकारात्मक ऊर्जा, भय से रक्षा, आध्यात्मिक शक्ति और देवी की कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ भक्त के भीतर आत्मविश्वास, भक्ति और सद्बुद्धि को बढ़ाता है।

ललिता चालीसा का अर्थ

ललिता चालीसा का सरल अर्थ है मां ललिता की दिव्य शक्ति, सौंदर्य, करुणा और कृपा का स्मरण। इसमें देवी से प्रार्थना की जाती है कि वे भक्त के जीवन से अज्ञान, भय, दुख, बाधा और नकारात्मकता को दूर करें और सुख, शांति और ज्ञान प्रदान करें।

ललिता चालीसा का महत्व

ललिता चालीसा का महत्व केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं है। यह भक्त को मन की शांति, आध्यात्मिक संतुलन, सकारात्मक सोच और देवी शक्ति से जुड़ने का मार्ग देती है। श्रीविद्या परंपरा में मां ललिता को परम शक्ति माना गया है, इसलिए उनकी स्तुति अत्यंत शुभ मानी जाती है।

मां ललिता को क्या चढ़ाना चाहिए?

मां ललिता को लाल या गुलाबी फूल, कमल, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, नारियल, फल, मिठाई, खीर, धूप, दीप और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। देवी पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और पवित्र भावना को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

ललिता किस देवी का स्वरूप हैं?

मां ललिता त्रिपुर सुंदरी आदिशक्ति का एक परम दिव्य स्वरूप मानी जाती हैं। वे शक्ति, ज्ञान, सौंदर्य, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना की देवी हैं। उन्हें राजराजेश्वरी, श्रीमाता और त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है।

विशेष अवसरों पर ललिता चालीसा

नवरात्रि, शुक्रवार, पूर्णिमा, ललिता पंचमी, देवी पूजा, श्रीविद्या उपासना, शक्ति पूजा और घर में विशेष मंगल कार्यों के अवसर पर ललिता चालीसा का पाठ शुभ माना जाता है।

ललिता चालीसा पाठ के Dos and Don’ts

क्या करें

साफ स्थान पर बैठकर पाठ करें।
मां ललिता की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।
मन को शांत रखकर श्रद्धा से पाठ करें।
पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा के बाद प्रसाद बांटें।

क्या न करें

अशुद्ध मन या जल्दबाजी में पाठ न करें।
पूजा स्थान को गंदा न रखें।
नकारात्मक भावना रखकर पूजा न करें।
केवल स्वार्थ या दिखावे के लिए पाठ न करें।
पाठ करते समय ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचें।

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