Dhanlakshmi Stotram in Hindi Lyrics PDF | धनलक्ष्मी स्तोत्रम्

Dhanlakshmi Stotram: Meaning, Benefits, Importance and FAQs

Dhanlakshmi Stotram is a sacred prayer dedicated to Maa Dhan Lakshmi, one of the eight forms of Goddess Lakshmi. “Dhan” means wealth, prosperity, money, grains, fortune, and abundance. This stotram is recited to seek blessings for financial stability, good luck, business growth, peace at home, and removal of money-related obstacles.

Maa Dhanlakshmi is worshipped as the giver of material prosperity, savings, success, and household abundance. Devotees believe that regular paath of Dhanlakshmi Stotram brings positivity, removes financial stress, and attracts divine blessings of Maa Lakshmi.

What is Dhanlakshmi Stotram?

Dhanlakshmi Stotram is a devotional hymn for Goddess Lakshmi in her Dhan Lakshmi form. It is recited with bhakti to invite wealth, fortune, and prosperity into life. Many people read it during Lakshmi puja, Friday worship, Diwali, Dhanteras, and special money-related prayers.

Dhanlakshmi Stotram In Hindi Lyrics

॥धनलक्ष्मी स्तोत्रम्॥

॥धनदा उवाच॥

देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम्।

कृपया पार्वती प्राह शंकरं करुणाकरम् ॥१॥

 ॥देव्युवाच॥

ब्रूहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम्।

दरिद्र दलनोपायमंजसैव धनप्रदम् ॥२॥

 ॥शिव उवाच॥

पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः।

उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया ॥३॥

 स सीतं सानुजं रामं सांजनेयं सहानुगम्।

प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥

 धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम्।

योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम ॥५॥

 पठंतः पाठयंतोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः।

धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता ॥६॥

 भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम्।

प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम् ॥७॥

 धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे।

त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम् ॥८॥

 धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते।

सुधनं र्धामिके देहि यजमानाय सत्वरम् ॥९॥

 रम्ये रुद्रप्रिये रूपे रामरूपे रतिप्रिये।

शिखीसखमनोमूर्त्ते प्रसीद प्रणते मयि ॥१०॥

 आरक्त- चरणाम्भोजे सिद्धि- सर्वार्थदायिके।

दिव्याम्बरधरे दिव्ये दिव्यमाल्यानुशोभिते ॥११॥

 समस्तगुणसम्पन्ने सर्वलक्षणलक्षिते।

शरच्चन्द्रमुखे नीले नील नीरज लोचने ॥१२॥

 चंचरीक चमू चारु श्रीहार कुटिलालके।

मत्ते भगवती मातः कलकण्ठरवामृते ॥१३॥

 हासाऽवलोकनैर्दिव्यैर्भक्तचिन्तापहारिके।

रूप लावण्य तारूण्य कारूण्य गुणभाजने ॥१४॥

 क्वणत्कंकणमंजीरे लसल्लीलाकराम्बुजे।

रुद्रप्रकाशिते तत्त्वे धर्माधरे धरालये ॥१५॥

 प्रयच्छ यजमानाय धनं धर्मेकसाधनम्।

मातस्त्वं मेऽविलम्बेन दिशस्व जगदम्बिके ॥१६॥

 कृपया करुरागारे प्रार्थितं कुरु मे शुभे।

वसुधे वसुधारूपे वसु वासव वन्दिते ॥१७॥

 धनदे यजमानाय वरदे वरदा भव।

ब्रह्मण्यैर्ब्राह्मणैः पूज्ये पार्वतीशिवशंकरे ॥१८॥

 स्तोत्रं दरिद्रताव्याधिशमनं सुधनप्रदम्।

श्रीकरे शंकरे श्रीदे प्रसीद मयिकिंकरे ॥१९॥

 पार्वतीशप्रसादेन सुरेश किंकरेरितम्।

श्रद्धया ये पठिष्यन्ति पाठयिष्यन्ति भक्तितः ॥२०॥

 सहस्रमयुतं लक्षं धनलाभो भवेद् ध्रुवम्

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।

भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन- धान्यादिसम्पदः ॥२१॥

 ॥इति श्री धनलक्ष्मी स्तोत्रं संपूर्णम्॥

 

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् : अर्थ, लाभ, महत्व एवं सामान्य प्रश्न

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् माता धनलक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। धनलक्ष्मी, अष्टलक्ष्मी के आठ स्वरूपों में से एक हैं और धन, समृद्धि, वैभव, सुख-शांति तथा आर्थिक उन्नति की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। इस स्तोत्र का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक स्थिरता और माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् क्या है?

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् देवी लक्ष्मी के धनलक्ष्मी स्वरूप की स्तुति में रचित एक दिव्य स्तोत्र है। इसमें माता की महिमा, कृपा और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले धन, ऐश्वर्य एवं समृद्धि का वर्णन किया गया है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा तथा लक्ष्मी पूजा के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद या संध्या समय दीपक जलाकर इसका पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् के लाभ

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् के नियमित पाठ से आर्थिक उन्नति, व्यापार में वृद्धि, धन संबंधी बाधाओं में कमी, घर में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है। यह स्तोत्र व्यक्ति को धन के सदुपयोग और आध्यात्मिक संतुलन की प्रेरणा भी देता है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का अर्थ

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का मुख्य अर्थ माता लक्ष्मी की स्तुति करना और उनसे धन, धान्य, सौभाग्य, सफलता तथा कल्याण की प्रार्थना करना है। यह स्तोत्र भक्तों को माँ की दिव्य कृपा से जोड़ता है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का महत्व

हिंदू धर्म में धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का विशेष महत्व है क्योंकि यह केवल धन प्राप्ति का साधन नहीं बल्कि जीवन में संतोष, कृतज्ञता और समृद्धि की भावना विकसित करने का माध्यम भी है। यह स्तोत्र भक्तों को धर्मपूर्वक अर्जित धन के महत्व का संदेश देता है।

माता धनलक्ष्मी को क्या अर्पित करें?

माता धनलक्ष्मी को कमल पुष्प, लाल या गुलाबी फूल, कुमकुम, अक्षत, फल, मिठाई, खीर, मखाना, मिश्री, धूप और घी का दीपक अर्पित किया जा सकता है। स्वच्छता और श्रद्धा के साथ की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् की अधिष्ठात्री देवी कौन हैं?

इस स्तोत्र की अधिष्ठात्री देवी माता धनलक्ष्मी हैं, जो देवी लक्ष्मी का वह स्वरूप हैं जो भक्तों को धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करती हैं।

धनलक्ष्मी स्तोत्रम् के लिए विशेष अवसर

दीपावली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, शरद पूर्णिमा, शुक्रवार, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और लक्ष्मी पूजा जैसे अवसरों पर धनलक्ष्मी स्तोत्रम् का पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

क्या करें और क्या न करें?

क्या करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पाठ करें।
घी का दीपक और धूप जलाएं।
माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
दान और सेवा का भाव रखें।
क्या न करें?
क्रोध, लालच या नकारात्मक भाव से पाठ न करें।
पूजा स्थल को अस्वच्छ न रखें।
धन का दुरुपयोग न करें।
किसी का अपमान या अनादर न करें।

FAQs
What is Dhanlakshmi Stotram?

Dhanlakshmi Stotram is a sacred hymn dedicated to Maa Dhan Lakshmi, the form of Goddess Lakshmi who blesses devotees with wealth, prosperity, and abundance.

When should we recite Dhanlakshmi Stotram?

You can recite it daily, especially on Friday morning or evening. Diwali, Dhanteras, Akshaya Tritiya, and Purnima are also considered highly auspicious.

What are the benefits of Dhanlakshmi Stotram?

It is believed to bring prosperity, financial stability, business growth, household peace, positive energy, and relief from money-related worries.

What is the meaning of Dhanlakshmi Stotram?

The stotram praises Maa Lakshmi as the giver of dhan, dhanya, success, fortune, and divine blessings.

Why is Dhanlakshmi Stotram important?

It is important because it helps devotees connect with Maa Lakshmi and develop gratitude, discipline, purity, and respect for wealth.

What offerings should be given to Maa Dhanlakshmi?

You can offer flowers, kumkum, rice, sweets, fruits, kheer, ghee diya, incense, and clean water.

Which deity is worshipped in Dhanlakshmi Stotram?

Maa Dhan Lakshmi, one of the Ashta Lakshmi forms, is worshipped through this stotram.

Can Dhanlakshmi Stotram be recited during Diwali?

Yes, Diwali and Dhanteras are among the best occasions to recite Dhanlakshmi Stotram.

 

What are the dos and don’ts of Dhanlakshmi Stotram?

Do recite with purity, faith, and devotion. Don’t recite with greed, negativity, or disrespect toward money, food, or worship.

Dhanlakshmi Stotram in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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