Lakshmi Puja Vidhi & Pujan Samagri in Hindi PDF | लक्ष्मी पूजा विधि

लक्ष्मी पूजा विधि: संपूर्ण पूजन प्रक्रिया, महत्व, लाभ एवं आवश्यक नियम

माता महालक्ष्मी हिंदू धर्म में धन, ऐश्वर्य, समृद्धि, सौभाग्य और शुभता की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि जहां स्वच्छता, सदाचार, सत्य, दान और भगवान का स्मरण होता है, वहां माता लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। लक्ष्मी पूजा केवल धन प्राप्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतोष, शांति, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करने का भी माध्यम है।

लक्ष्मी पूजा क्या है?

लक्ष्मी पूजा माता महालक्ष्मी की आराधना का एक धार्मिक अनुष्ठान है। इस पूजा में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कई परंपराओं में भगवान कुबेर का भी पूजन किया जाता है। इसका उद्देश्य धन, धान्य, सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करना होता है।

लक्ष्मी पूजा कब करनी चाहिए?

यद्यपि लक्ष्मी पूजा प्रतिदिन की जा सकती है, किन्तु निम्न अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:

दीपावली की अमावस्या
धनतेरस
प्रत्येक शुक्रवार
शरद पूर्णिमा
अक्षय तृतीया
कोजागरी पूर्णिमा
नवरात्रि
नए घर या व्यवसाय के शुभारंभ पर

दीपावली की रात्रि में प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।

लक्ष्मी पूजा का अर्थ

“लक्ष्मी” शब्द का अर्थ है लक्ष्य, शुभता, संपन्नता और कल्याण। लक्ष्मी पूजा का वास्तविक अर्थ केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में सद्गुणों, संतोष, सेवा, दान, विवेक और सकारात्मकता को विकसित करना है।

लक्ष्मी पूजा का महत्व

शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी वहां निवास करती हैं जहां:

स्वच्छता होती है
परिश्रम और ईमानदारी होती है
बड़ों का सम्मान होता है
दान और धर्म का पालन होता है
भगवान का स्मरण होता है

लक्ष्मी पूजा व्यक्ति को धन के सदुपयोग, अनुशासन और धार्मिक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

लक्ष्मी पूजा के लाभ

घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आर्थिक उन्नति और स्थिरता की प्राप्ति होती है।
परिवार में सुख-शांति और सौहार्द बढ़ता है।
व्यापार और कार्यक्षेत्र में प्रगति की संभावनाएं बढ़ती हैं।
मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है।
धर्म, दान और सदाचार के प्रति रुचि बढ़ती है।
आध्यात्मिक संतोष और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

लक्ष्मी पूजा की अधिष्ठात्री देवी

इस पूजा की मुख्य अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी हैं। उनके साथ भगवान गणेश का पूजन विघ्नों को दूर करने के लिए तथा भगवान कुबेर का पूजन धन की रक्षा और वृद्धि के लिए किया जाता है।

लक्ष्मी पूजा में आवश्यक सामग्री

माता लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
पूजा चौकी
लाल या पीला वस्त्र
कलश
नारियल
आम के पत्ते
अक्षत (चावल)
रोली एवं कुमकुम
हल्दी
पुष्प एवं माला
कमल पुष्प (यदि उपलब्ध हो)
धूप एवं दीप
घी का दीपक
पंचामृत
फल एवं मिठाई
खील-बताशे
सुपारी
पान
दक्षिणा

लक्ष्मी पूजा विधि

1. स्थान की शुद्धि

पूजा स्थल और पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीप सजाएं।

2. चौकी स्थापना

स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

3. कलश स्थापना

जल से भरा कलश स्थापित करें। उसमें आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें।

4. संकल्प

अपने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें।

5. गणेश पूजन

सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और उनसे पूजा निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।

6. लक्ष्मी पूजन

माता लक्ष्मी को पुष्प, अक्षत, कुमकुम, धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित करें। लक्ष्मी मंत्र, श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।

पूजा भगवती लक्ष्मी की साधना के साथ शुरू करना चाहिए . ध्यान आप के सामने पहले से ही स्थापित श्री लक्ष्मी प्रतिमा के सामने किया जाना चाहिए . भगवती श्री लक्ष्मी का मनन करते हुए निम्न मंत्र का जाप किया जाना चाहिए

या सा पद्मासनस्था, विपुलकटितटी, पद्मदलायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिः, स्तनभरनमिता, शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।।
लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणिगजखचितैः, स्नापिता हेमकुम्भैः।
नित्यं सा पद्महस्ता, मम वसतु गृहे, सर्वमांगल्ययुक्ता।।

Laxmi Ang Puja

बायें हाथ में अक्षत लेकर दायें हाथ से थोड़ा-थोड़ा छोड़ते जायें— ऊं चपलायै नम: पादौ पूजयामि ऊं चंचलायै नम: जानूं पूजयामि, ऊं कमलायै नम: कटि पूजयामि, ऊं कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि, ऊं जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि, ऊं विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि, ऊं कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि, ऊं कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि, ऊं श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।

Ashtsidhi Puja

अंग पूजन की भांति हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें. ऊं अणिम्ने नम:, ओं महिम्ने नम:, ऊं गरिम्णे नम:, ओं लघिम्ने नम:, ऊं प्राप्त्यै नम: ऊं प्राकाम्यै नम:, ऊं ईशितायै नम: ओं वशितायै नम:।

Asht Laxmi Puja

अंग पूजन एवं अष्टसिद्धि पूजा की भांति हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें. ऊं आद्ये लक्ष्म्यै नम:, ओं विद्यालक्ष्म्यै नम:, ऊं सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:, ओं अमृत लक्ष्म्यै नम:, ऊं लक्ष्म्यै नम:, ऊं सत्य लक्ष्म्यै नम:, ऊं भोगलक्ष्म्यै नम:, ऊं योग लक्ष्म्यै नम:

अब श्री लक्ष्मी को धूप की पेशकश अब श्री लक्ष्मी को दीप की पेशकश अब श्री लक्ष्मी को नैवैद्य अर्पणदेवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें लक्ष्मी आरती

7. आरती

अंत में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें तथा परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।

माता लक्ष्मी को क्या अर्पित करें?

माता लक्ष्मी को विशेष रूप से निम्न वस्तुएं प्रिय मानी जाती हैं:

कमल पुष्प
लाल एवं गुलाबी पुष्प
खीर
बताशे
मिश्री
नारियल
केसर युक्त मिठाई
पंचामृत
फल
घी का दीपक

विशेष अवसर

दीपावली
धनतेरस
अक्षय तृतीया
शुक्रवार
शरद पूर्णिमा
कोजागरी पूर्णिमा
नवरात्रि
गृह प्रवेश
नए व्यवसाय का शुभारंभ

क्या करें?

पूजा से पहले स्नान करें।
स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर और पूजा स्थल को साफ रखें।
श्रद्धा और एकाग्रता से पूजा करें।
दान और सेवा का भाव रखें।
ईमानदारी से अर्जित धन का सम्मान करें।

क्या न करें?

पूजा के समय क्रोध या विवाद न करें।
घर में गंदगी और अव्यवस्था न रखें।
धन का अपमान न करें।
झूठ और बेईमानी से बचें।
पूजा को केवल धन प्राप्ति का साधन न समझें।
दूसरों का अनादर न करें।
निष्कर्ष

लक्ष्मी पूजा सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण पूजा है जो केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को सदाचार, स्वच्छता, दान, संतोष और ईश्वर भक्ति का संदेश देती है। श्रद्धा और शास्त्रोक्त विधि से की गई लक्ष्मी पूजा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।

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