श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम् | Shri Lakshmi Dwadash Naam Stotram in Hindi Lyrics

माँ महालक्ष्मी के बारह पवित्र नाम

श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम्

श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम् माँ लक्ष्मी के बारह पवित्र नामों का संक्षिप्त और सुंदर स्तोत्र है। इसमें देवी के कमल स्वरूप, भगवान विष्णु से उनके दिव्य संबंध, उनके सौंदर्य तथा कल्याणकारी महालक्ष्मी रूप का स्मरण किया गया है।

कुछ पाठ-परंपराओं में इसे श्रीभद्रलक्ष्मी स्तव अथवा संक्षिप्त लक्ष्मीहृदय स्तोत्र से भी संबंधित माना गया है।

संक्षिप्त जानकारी

स्तोत्र का नाम
श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम्
आराध्य देवी
माँ महालक्ष्मी
कुल पवित्र नाम
बारह नाम
उपयुक्त समय
प्रातःकाल, शुक्रवार या लक्ष्मी पूजन

श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम् मूल पाठ

॥ श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम् ॥

श्रीदेवी प्रथमं नाम द्वितीयं अमृतोद्भवा ।
तृतीयं कमला प्रोक्ता चतुर्थं चन्द्रशोभना ॥ १॥

पञ्चमं विष्णुपत्नी च षष्ठं श्रीवैष्णवी तथा ।
सप्तमन्तु वरारोहा अष्टमं हरिवल्लभा ॥ २॥

नवमं शार्ङ्गिणी प्रोक्ता दशमं देवदेविका ।
एकादशं महलक्ष्मीः द्वादशं लोकसुन्दरी ॥ ३॥

श्रीः पद्मा कमला मुकुन्दमहिषी लक्ष्मी त्रिलोकेश्वरी
मा क्षीराब्धिसुता विरिञ्चिजननी विद्या सरोजासना ।
सर्वाभीष्टफलप्रदेति सततं नामानि ये द्वादश प्रातः
शुद्धतराः पठन्त्यभिमतान् सर्वान् लभन्ते शुभान् ॥ ४॥

भद्रलक्ष्मीस्तवं नित्यं पुण्यमेतच्छुभावहम् ।
काले स्नात्वाऽपि कावेर्यां जप श्रीवृक्षसन्निदौ ॥

॥ इति श्रीलक्ष्मी द्वादशनामस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्रम् का हिंदी अर्थ

प्रथम श्लोक का अर्थ

माँ लक्ष्मी का पहला नाम श्रीदेवी, दूसरा अमृतोद्भवा, तीसरा कमला और चौथा चन्द्रशोभना है। ये नाम देवी के ऐश्वर्य, समुद्र से प्रकट होने, कमल पर निवास करने और चंद्रमा के समान मनोहर स्वरूप को व्यक्त करते हैं।

द्वितीय श्लोक का अर्थ

देवी का पाँचवाँ नाम विष्णुपत्नी, छठा श्रीवैष्णवी, सातवाँ वरारोहा और आठवाँ हरिवल्लभा है। ये नाम माँ लक्ष्मी को भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति, सुंदर स्वरूप वाली और श्रीहरि को अत्यंत प्रिय देवी के रूप में स्मरण करते हैं।

तृतीय श्लोक का अर्थ

नवाँ नाम शार्ङ्गिणी, दसवाँ देवदेविका, ग्यारहवाँ महालक्ष्मी और बारहवाँ लोकसुन्दरी है। इन नामों में देवी को दिव्य आयुध धारण करने वाली, देवताओं की आराध्या, महान लक्ष्मी और समस्त संसार की सुंदरता का स्रोत बताया गया है।

चतुर्थ श्लोक का अर्थ

इस श्लोक में माँ लक्ष्मी के अन्य प्रसिद्ध संबोधन—श्री, पद्मा, कमला, मुकुन्दमहिषी, त्रिलोकेश्वरी, क्षीरसागर की पुत्री, विद्या और सरोजासना—स्मरण किए गए हैं। शुद्ध मन से प्रातःकाल इन नामों का पाठ करना शुभ और कल्याणकारी माना गया है।

माँ लक्ष्मी के बारह नाम और उनका भाव

1. श्रीदेवी

शुभता और दिव्य ऐश्वर्य की देवी।

2. अमृतोद्भवा

अमृतमय समुद्र से प्रकट हुईं।

3. कमला

कमल पर विराजमान देवी।

4. चन्द्रशोभना

चंद्रमा के समान सौम्य और सुंदर।

5. विष्णुपत्नी

भगवान विष्णु की दिव्य सहधर्मिणी।

6. श्रीवैष्णवी

भगवान विष्णु की शक्ति स्वरूपा।

7. वरारोहा

दिव्य और मनोहर स्वरूप वाली।

8. हरिवल्लभा

श्रीहरि को अत्यंत प्रिय देवी।

9. शार्ङ्गिणी

शार्ङ्ग धनुष से संबंधित दिव्य स्वरूप।

10. देवदेविका

देवताओं द्वारा पूजित देवी।

11. महालक्ष्मी

समस्त शुभता और समृद्धि की अधिष्ठात्री।

12. लोकसुन्दरी

तीनों लोकों को शोभा देने वाली।

सरल पाठ विधि

1. शुद्ध स्थान

स्वच्छ होकर शांत पूजा-स्थान पर बैठें।

2. दीप और पुष्प

सुरक्षित रूप से दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें।

3. ध्यानपूर्वक पाठ

शब्दों का स्पष्ट और शांत उच्चारण करें।

4. प्रार्थना

अंत में सद्बुद्धि, संतोष और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

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सामान्य प्रश्न

श्री लक्ष्मी द्वादशनाम स्तोत्र में कितने नाम हैं?

इस स्तोत्र के प्रथम तीन श्लोकों में माँ लक्ष्मी के बारह पवित्र नाम दिए गए हैं।

इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

इसे प्रातःकाल, शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस या नियमित लक्ष्मी पूजन के समय पढ़ा जा सकता है।

क्या पाठ के लिए विशेष सामग्री आवश्यक है?

नहीं। स्वच्छता, श्रद्धा और शांत मन मुख्य हैं। उपलब्ध होने पर दीप, पुष्प और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।

धार्मिक सूचना:
स्तोत्र के शब्दों, उच्चारण और पाठ-विधि में क्षेत्रीय अथवा परंपरागत अंतर मिल सकते हैं। पाठ आध्यात्मिक श्रद्धा का विषय है और किसी निश्चित आर्थिक या व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं देता।

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