श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् | Sri Bhadra Lakshmi Stavam Hindi

माँ महालक्ष्मी की मंगलमयी स्तुति

श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम्

श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् माँ लक्ष्मी के मंगलकारी स्वरूप और उनके पवित्र नामों का स्मरण करने वाला संक्षिप्त संस्कृत स्तव है। इसमें देवी को श्रीदेवी, कमला, विष्णुपत्नी, हरिवल्लभा, महालक्ष्मी और लोकसुन्दरी जैसे दिव्य नामों से प्रणाम किया गया है।

इस लघु स्तव का पाठ दैनिक लक्ष्मी पूजन, शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस तथा अन्य शुभ अवसरों पर किया जा सकता है।

श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् की संक्षिप्त जानकारी

स्तोत्र का नाम
श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम्
आराध्य देवी
माँ महालक्ष्मी
भाषा
संस्कृत
पाठ अवधि
लगभग 2 से 4 मिनट
उपयुक्त दिन
प्रतिदिन अथवा शुक्रवार
मुख्य भाव
शुभता, सद्बुद्धि और कल्याण की प्रार्थना

श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् मूल पाठ

नीचे श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् का प्रचलित देवनागरी पाठ दिया गया है। विभिन्न पुस्तकों और परंपराओं में कुछ नामों या शब्दों के पाठांतर मिल सकते हैं।

॥ श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् ॥

श्रीदेवी प्रथमं नाम द्वितीयं अमृतोद्भवा ।
तृतीयं कमला प्रोक्ता चतुर्थं चन्द्रशोभना ॥ १॥

पञ्चमं विष्णुपत्नी च षष्ठं श्रीवैष्णवी तथा ।
सप्तमन्तु वरारोहा अष्टमं हरिवल्लभा ॥ २॥

नवमं शार्ङ्गिणी प्रोक्ता दशमं देवदेविका ।
एकादशं महलक्ष्मीः द्वादशं लोकसुन्दरी ॥ ३॥

श्रीः पद्मा कमला मुकुन्दमहिषी लक्ष्मी त्रिलोकेश्वरी
मा क्षीराब्धिसुता विरिञ्चिजननी विद्या सरोजासना ।
सर्वाभीष्टफलप्रदेति सततं नामानि ये द्वादश प्रातः
शुद्धतराः पठन्त्यभिमतान् सर्वान् लभन्ते शुभान् ॥ ४॥

भद्रलक्ष्मीस्तवं नित्यं पुण्यमेतच्छुभावहम् ।
काले स्नात्वाऽपि कावेर्यां जप श्रीवृक्षसन्निदौ ॥

॥ इति श्रीभद्रलक्ष्मीस्तवं संपूर्णम् ॥

श्री भद्रलक्ष्मी स्तवम् का हिंदी अर्थ

प्रथम श्लोक का अर्थ

माँ लक्ष्मी का पहला नाम श्रीदेवी, दूसरा अमृतोद्भवा, तीसरा कमला और चौथा चन्द्रशोभना है। इन नामों में देवी को शुभता की अधिष्ठात्री, अमृतमय समुद्र से प्रकट हुई, कमल पर विराजमान तथा चंद्रमा के समान सौम्य और सुंदर बताया गया है।

द्वितीय श्लोक का अर्थ

देवी का पाँचवाँ नाम विष्णुपत्नी, छठा श्रीवैष्णवी, सातवाँ वरारोहा और आठवाँ हरिवल्लभा है। ये नाम माँ लक्ष्मी के भगवान विष्णु की दिव्य सहधर्मिणी, उनकी शक्ति तथा श्रीहरि को प्रिय मंगलमयी देवी होने का स्मरण कराते हैं।

तृतीय श्लोक का अर्थ

नवाँ नाम शार्ङ्गिणी, दसवाँ देवदेविका, ग्यारहवाँ महालक्ष्मी और बारहवाँ लोकसुन्दरी है। इन नामों द्वारा देवी को दिव्य शक्ति से युक्त, देवताओं की आराध्या, महान लक्ष्मी और समस्त लोकों को शोभा प्रदान करने वाली कहा गया है।

चतुर्थ श्लोक का अर्थ

इस श्लोक में देवी को श्री, पद्मा, कमला, भगवान मुकुन्द की महिषी, लक्ष्मी, त्रिलोकेश्वरी, क्षीरसागर की पुत्री, विरिञ्चि अर्थात ब्रह्माजी की जननी, विद्या, कमल पर विराजमान और मनोवांछित शुभ फल प्रदान करने वाली कहा गया है। फलश्रुति के अनुसार पवित्र मन से प्रातःकाल इन नामों का स्मरण शुभ माना गया है।

अंतिम श्लोक का अर्थ

अंतिम पंक्तियों में भद्रलक्ष्मी स्तव को पुण्यदायक और शुभता प्रदान करने वाला बताया गया है। इसमें स्नान करके पवित्र भाव से, कावेरी के समीप अथवा श्रीवृक्ष की सन्निधि में जप करने का उल्लेख मिलता है।

भद्रलक्ष्मी स्तव में माँ लक्ष्मी के बारह नाम

1. श्रीदेवी

शुभता और दिव्य ऐश्वर्य की देवी।

2. अमृतोद्भवा

अमृतमय समुद्र से प्रकट हुईं।

3. कमला

कमल पर विराजमान देवी।

4. चन्द्रशोभना

चंद्रमा के समान सौम्य स्वरूप।

5. विष्णुपत्नी

भगवान विष्णु की दिव्य सहधर्मिणी।

6. श्रीवैष्णवी

श्रीविष्णु की शक्ति स्वरूपा।

7. वरारोहा

दिव्य और मनोहर स्वरूप वाली।

8. हरिवल्लभा

भगवान हरि को अत्यंत प्रिय।

9. शार्ङ्गिणी

दिव्य शक्ति से युक्त देवी।

10. देवदेविका

देवताओं द्वारा पूजित देवी।

11. महालक्ष्मी

समस्त मंगल और समृद्धि की अधिष्ठात्री।

12. लोकसुन्दरी

सभी लोकों की शोभा स्वरूपा।

श्री भद्रलक्ष्मी स्तव का महत्व

यह स्तव माँ लक्ष्मी के अनेक मंगलकारी स्वरूपों का एक साथ स्मरण कराता है। इसके नाम केवल भौतिक संपत्ति ही नहीं, बल्कि शुभता, विद्या, संतोष, पारिवारिक कल्याण और संसाधनों के सदुपयोग जैसे व्यापक भावों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सरल पाठ विधि

1. पूजा स्थान स्वच्छ करें

स्वच्छ होकर शांत स्थान पर माँ लक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा के सामने बैठें।

2. दीप प्रज्वलित करें

सुरक्षित रूप से घी या तेल का दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें।

3. स्पष्ट उच्चारण करें

स्तोत्र को धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक एक या तीन बार पढ़ें।

4. मंगल प्रार्थना करें

अंत में सद्बुद्धि, शांति, संतोष और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

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श्री भद्रलक्ष्मी स्तव से जुड़े सामान्य प्रश्न

श्री भद्रलक्ष्मी स्तव क्या है?

यह माँ लक्ष्मी के मंगलकारी नामों और स्वरूपों का स्मरण करने वाला संक्षिप्त संस्कृत स्तव है।

इस स्तव का पाठ कब किया जा सकता है?

इसका पाठ प्रतिदिन प्रातःकाल, शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस या नियमित लक्ष्मी पूजन के समय किया जा सकता है।

क्या पाठ के लिए विशेष पूजा सामग्री आवश्यक है?

विशेष सामग्री अनिवार्य नहीं है। स्वच्छता, श्रद्धा और शांत मन मुख्य हैं। उपलब्ध होने पर दीप, पुष्प और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।

धार्मिक सूचना:
स्तोत्र की पंक्तियों, नामों और उच्चारण में अलग-अलग पुस्तकों तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पाठांतर मिल सकते हैं। पाठ श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का विषय है; इसे किसी निश्चित आर्थिक, व्यावसायिक या व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

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