श्री महालक्ष्मी स्तुति | Shri Mahalakshmi Stuti in Hindi

माँ लक्ष्मी के विविध कल्याणकारी स्वरूपों की प्रार्थना

श्री महालक्ष्मी स्तुति

श्री महालक्ष्मी स्तुति माँ लक्ष्मी के अनेक मंगलकारी स्वरूपों को समर्पित संस्कृत प्रार्थना है। इसमें आदिलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, आरोग्यलक्ष्मी और सिद्धलक्ष्मी सहित देवी के विभिन्न रूपों का स्मरण किया गया है।

यह स्तुति यश, विद्या, विवेक, स्वास्थ्य, साहस, शुभता, पारिवारिक कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना का सुंदर माध्यम है।

श्री महालक्ष्मी स्तुति की संक्षिप्त जानकारी

पाठ का नाम
श्री महालक्ष्मी स्तुतिः
आराध्य देवी
माँ महालक्ष्मी
कुल मुख्य श्लोक
18 श्लोक
भाषा
संस्कृत
पाठ अवधि
लगभग 5 से 8 मिनट
उपयुक्त समय
प्रातःकाल, शुक्रवार या लक्ष्मी पूजन

श्री महालक्ष्मी स्तुति मूल पाठ

नीचे श्री महालक्ष्मी स्तुति का प्रचलित देवनागरी पाठ दिया गया है। कुछ पुस्तकों और पाठ-परंपराओं में उच्चारण, विराम अथवा वैकल्पिक पदों का सामान्य अंतर मिल सकता है।

॥ श्री महालक्ष्मीस्तुतिः ॥

आदिलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरूपिणि ।
यशो देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १॥

सन्तानलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्रपौत्रप्रदायिनि ।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ २॥

विद्यालक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्मविद्यास्वरूपिणि ।
विद्यां देहि कलां देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ३॥

धनलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदारिद्र्यनाशिनि ।
धनं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ४॥

धान्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरणभूषिते ।
धान्यं देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ५॥

मेधालक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलिकल्मषनाशिनि ।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ६॥

गजलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेवस्वरूपिणि ।
अश्वांश्च गोकुलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ७॥

धीरलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्तिस्वरूपिणि ।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ८॥

जयलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वकार्यजयप्रदे ।
जयं देहि शुभं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ९॥

भाग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमंगल्यविवर्धिनि ।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १०॥

कीर्तिलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्षस्थलस्थिते ।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ११॥

आरोग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वरोगनिवारणि ।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १२॥

सिद्धलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वसिद्धिप्रदायिनि ।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १३॥

सौन्दर्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालंकारशोभिते ।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १४॥

साम्राज्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १५॥

मंगले मंगलाधारे मांगल्ये मंगलप्रदे ।
मंगलार्थं मंगलेशि मांगल्यं देहि मे सदा ॥ १६॥

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १७॥

शुभं भवतु कल्याणी आयुरारोग्यसम्पदाम् ।
मम शत्रुविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते ॥ १८॥

दीपज्योति नमस्तेऽस्तु दीपज्योति नमोऽस्तु ते ।

॥ इति श्री महालक्ष्मीस्तुतिः सम्पूर्णा ॥

श्री महालक्ष्मी स्तुति का हिंदी अर्थ

श्लोक 1 से 3

हे परब्रह्म स्वरूपिणी आदिलक्ष्मी! हमें यश, आवश्यक संसाधन और उचित कामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद दें। हे सन्तानलक्ष्मी! परिवार और आने वाली पीढ़ियों का कल्याण करें। हे ब्रह्मविद्या स्वरूपिणी विद्यालक्ष्मी! हमें ज्ञान, शिक्षा, कला और उपयोगी कौशल प्रदान करें।

श्लोक 4 से 6

हे धनलक्ष्मी! अभाव और दरिद्रता को दूर कर जीवन में समृद्धि प्रदान करें। हे धान्यलक्ष्मी! अन्न, आजीविका और घर की आवश्यकताओं की रक्षा करें। हे मेधालक्ष्मी! अज्ञान और नकारात्मकता को दूर करके बुद्धि, प्रज्ञा तथा उचित निर्णय लेने की क्षमता दें।

श्लोक 7 से 9

हे गजलक्ष्मी! पशुधन, साधन और स्थिर समृद्धि का आशीर्वाद दें। हे पराशक्ति स्वरूपिणी धीरलक्ष्मी! हमें धैर्य, साहस, ऊर्जा और बल प्रदान करें। हे जयलक्ष्मी! हमारे धर्मसम्मत कार्यों में सफलता और शुभ परिणाम प्रदान करें।

श्लोक 10 से 12

हे भाग्यलक्ष्मी! जीवन में सौभाग्य, सद्भाव और मंगल बढ़ाएँ। भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर निवास करने वाली कीर्तिलक्ष्मी हमें सद्कर्मों से प्राप्त सम्मान और अच्छी प्रतिष्ठा दें। हे आरोग्यलक्ष्मी! दीर्घायु, स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का आशीर्वाद प्रदान करें।

श्लोक 13 से 15

हे सिद्धलक्ष्मी! साधना, शिक्षा और शुभ प्रयासों में सिद्धि प्रदान करें। हे सौन्दर्यलक्ष्मी! हमारे बाहरी रूप के साथ विचारों, व्यवहार और चरित्र में भी सुंदरता लाएँ। हे साम्राज्यलक्ष्मी! भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करें।

श्लोक 16 से 18

हे मंगल की आधार और मंगल प्रदान करने वाली देवी! हमारे जीवन में सदैव शुभता बनाए रखें। हे नारायणी! आप शरण देने वाली और धर्मपूर्ण उद्देश्यों को सिद्ध करने वाली हैं, आपको नमस्कार है। दीपक की पवित्र ज्योति हमें कल्याण, स्वास्थ्य, शांति और विरोधी परिस्थितियों से रक्षा प्रदान करे।

स्तुति में वर्णित माँ लक्ष्मी के प्रमुख स्वरूप

इस स्तुति में समृद्धि को केवल धन तक सीमित नहीं माना गया है। ज्ञान, अन्न, स्वास्थ्य, साहस, कीर्ति, परिवार और आध्यात्मिक उन्नति भी लक्ष्मी के व्यापक स्वरूप हैं।

आदिलक्ष्मी
सन्तानलक्ष्मी
विद्यालक्ष्मी
धनलक्ष्मी
धान्यलक्ष्मी
मेधालक्ष्मी
गजलक्ष्मी
धीरलक्ष्मी
जयलक्ष्मी
भाग्यलक्ष्मी
कीर्तिलक्ष्मी
आरोग्यलक्ष्मी
सिद्धलक्ष्मी
सौन्दर्यलक्ष्मी
साम्राज्यलक्ष्मी

श्री महालक्ष्मी स्तुति का महत्व

इस स्तुति का मुख्य संदेश यह है कि वास्तविक समृद्धि अनेक रूपों में प्रकट होती है। धन के साथ ज्ञान, स्वास्थ्य, धैर्य, अन्न, प्रतिष्ठा, परिवार, सदाचार और आत्मिक शांति भी संतुलित तथा पूर्ण जीवन के आवश्यक अंग हैं।

सरल पाठ विधि

1. पूजा स्थान स्वच्छ करें

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत पूजा-स्थान पर बैठें।

2. दीप प्रज्वलित करें

सुरक्षित रूप से घी या तेल का दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें।

3. शांत गति से पाठ करें

स्तोत्र का स्पष्ट उच्चारण करते हुए प्रत्येक स्वरूप का ध्यान करें।

4. कृतज्ञता व्यक्त करें

अंत में उपलब्ध साधनों के लिए धन्यवाद देकर सद्बुद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।

माँ लक्ष्मी के अन्य स्तोत्र हिंदी में

माँ महालक्ष्मी की अन्य प्रमुख स्तुतियाँ, नाम स्तोत्र और वैदिक प्रार्थनाएँ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक चुनें।

श्री महालक्ष्मी स्तुति से जुड़े सामान्य प्रश्न

श्री महालक्ष्मी स्तुति में कितने श्लोक हैं?

इसके प्रचलित पाठ में 18 मुख्य श्लोक और अंत में दीपज्योति को नमस्कार करने वाली एक संक्षिप्त पंक्ति दी गई है।

श्री महालक्ष्मी स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल, शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और नियमित लक्ष्मी पूजन के समय किया जा सकता है।

क्या इस स्तुति में केवल धन की प्रार्थना है?

नहीं। इसमें धन के साथ विद्या, अन्न, प्रज्ञा, साहस, स्वास्थ्य, कीर्ति, परिवार, सौभाग्य, सफलता और आध्यात्मिक मुक्ति की भी प्रार्थना की गई है।

क्या पाठ के लिए विशेष सामग्री अनिवार्य है?

विशेष सामग्री अनिवार्य नहीं है। स्वच्छता, श्रद्धा और शांत मन मुख्य हैं। उपलब्ध होने पर दीप, पुष्प, जल और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।

धार्मिक सूचना:
श्री महालक्ष्मी स्तुति के कुछ संस्करणों में शब्दों, विराम और वैकल्पिक पदों का सामान्य पाठांतर मिलता है। स्वास्थ्य, धन अथवा सफलता से संबंधित पंक्तियाँ पारंपरिक आध्यात्मिक प्रार्थनाएँ हैं; इन्हें किसी निश्चित आर्थिक, चिकित्सकीय या व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

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